Maa Chandraghanta: तीसरा नवरात्र माँ चंद्रघंटा की होती है पूजा
देवी चंद्रघंटा की पूजा से साधक को जीवन में जाने अनजाने में आने वाले किसी भी संकट से छुटकारा मिलता है और विजय की प्राप्ति होती है.

लखनऊ। (Maa Chandraghanta) चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है. मान्यता है कि देवी चंद्रघंटा की पूजा से साधक को जीवन में जाने अनजाने में आने वाले किसी भी संकट से छुटकारा मिलता है और विजय की प्राप्ति होती है. (Maa Chandraghanta)
(Maa Chandraghanta) ऐसे हुआ माता चंद्रघंटा का अवतार
शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्र में देवी के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा होती है और हर दिन की पूजा का एक खास महत्व है. देवी अवतार की कथाशास्त्रों का उल्लेख करते हुए पञ्चांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू कहते हैं कि देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में जब देवता जीतने में असफल रहे तब त्रिदेव यानि की भगवान ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव ने उन्हें मां दुर्गा की पूजा करने की सलाह दी.
जिसके बाद देवताओं ने मां दुर्गा की पूजा-आराधना की और उन्हें प्रसन्न किया. जिसके बाद मां दुर्गा ने देवी चंद्रघंटा का अवतार लिया. मां चंद्रघंटा को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने तेज, तलवार और सिंह प्रदान किया. किराडू ने बताया कि नवरात्र के समय महिषासुर का देवताओं के साथ युद्ध चल रहा था और उसी समय देवी के अलग-अलग अवतार हुए थे. मां चंद्रघंटा का अवतार भी इसी समय हुआ था.
पञ्चांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू ने बताया कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है. माता चंद्रघंटा को कल्याणकारी और शांतिदायक का रूप मानते हैं. माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा का दृश्य है और इसी कारण मां के इस स्वरूप को चंद्रघंटा नाम मिला.
शारीरिक रूप से कष्ट पाने वाले लोग, अगर मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं तो उनकी जटिल रोगों की पीड़ा दूर हो सकती है. किराडू ने बताया कि मां दुर्गा की पूजा में मालपुआ और खीर का भोग लगता है, जो मां को अति प्रिय है मां चंद्रघंटा की पूजा आराधना में देशी गाय का दूध का अर्पण करने से मां अति प्रसन्न होती हैं इसके अलावा माता को सभी प्रकार के पुष्प प्रिय हैं, लेकिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा करते हुए मदार के पुष्प अर्पण करने चाहिए.