Lucknow Metro: होली पर आठ घण्टे मेट्रो और दो दिन चिड़ियाघर बंद
चिड़ियाघर प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

लखनऊ। (Lucknow Metro) होली के अवसर पर लखनऊ मेट्रो 8 घंटे बंद रहेगी जबकि नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) होली के अवसर पर दो दिन 13 व 14 मार्च को पूर्णतः बंद रहेगा। प्राणि उद्यान की निदेशक अदिति शर्मा ने बताया कि होली के बाद 15 मार्च से चिड़ियाघर फिर अपने नियमित समय पर आम जनता के लिए खोला जाएगा। चिड़ियाघर प्रशासन ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित तिथियों को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। (Lucknow Metro)
(Lucknow Metro) होली पर आठ घंटे बंद रहेगी मेट्रो
होली पर रंग को देखते हुए 14 मार्च को मेट्रो सेवा दोपहर तक बंद रहेगी। मेट्रो का संचालन दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगा और रोज की तरह रात 10:30 बजे तक चलेगा। सामान्य दिनों में संचालन सुबह छह से रात साढ़े दस बजे तक होता है। ये सूचना मेट्रो प्रबंधन की ओर से मंगलवार को जारी की गई है।
मंदिर, पार्क, अपार्टमेंट भी तैयार, होली पर मचाएंगे धमाल
होली 14 मार्च को है, मगर शहर में धमाल शुरू हो चुका है। त्योहार को लेकर मस्ती ऐसी है कि अभी से कई जगह रंग-गुलाल बरसने लगे हैं। 14 मार्च को यह खुमारी और चढ़ेगी। अपार्टमेंट, पार्क से लेकर मंदिर तक भी इसके लिए तैयार हो चुके हैं। आईए हम आपको बताते हैं कि शहर में कहां किस तरीके हो रही होली की तैयारी।
मंदिरों की तैयारी
इस्कॉन मंदिर : सुशांत गोल्फ सिटी स्थित इस्कॉन मंदिर में 14 मार्च को गौर पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। यह दिन चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य दिवस भी है। मंदिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु ने बताया कि शाम 5:30 बजे अभिषेक, 6:30 बजे आरती और सात बजे गौर कथा होगी। शाम 7:30 बजे भक्तों को प्रसाद वितरित होगा।
मनकामेश्वर मंदिर : मनकामेश्वर मंदिर की मंहत देव्या गिरी ने बताया कि 14 मार्च को मंदिर में फूलों की होली होगी, जिसमें पहली होली संतों, उसके बाद भक्तों के साथ होगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को ठंडाई के साथ प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
लेटे हुए हनुमान मंदिर : लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत डॉ. विवेक तांगड़ी ने बताया कि 13 मार्च को हनुमान जी को सिंदूर अर्पित किया जाएगा। इसके बाद 101 किलो गुलाल, 200 किलो गेंदा और गुलाब के फूल, केंवड़ा और इत्र से होली खेली जाएगी। लोकगायिका शिखा श्रीवास्तव और शशांक सागर अवधी लोकगीतों से होली के रंग बिखेंरेगे।
श्रीश्याम मंदिर : बीरबल साहनी मार्ग पर स्थित श्रीश्याम मंदिर में 10 क्विंटल हर्बल गुलाल व तीन क्विंटल फूलों से होली खेली जाएगी। समिति के महामंत्री रूपेश अग्रवाल ने बताया कि श्री श्याम परिवार लखनऊ 14 मार्च को सुबह छह बजे से होली उत्सव मनाएगा। इसमें वृंदावन धाम की तर्ज पर आयोजन होंगे। 10 क्विंटल हर्बल गुलाल व तीन क्विंटल फूलों की व्यवस्था की गई है।
यूपी के इस गांव में लंगोट पहनकर खेलते हैं होली, 700 साल पुरानी है यह अनोखी पंरपरा
पूरी दुनियाभर में ब्रज की होली प्रसिद्ध है। यहां फूलों, रंग, गुलाल, लड्डू मार और लठमार होली खेली जाती है। लेकिन आगरा जगनेर ब्लॉक का एक ऐसा गांव जहां 700 सालों से एक अनूठी परंपरा है। यहां के युवा लंगोट पहनकर होली खेलते हैं। इनके बीच शक्ति प्रदर्शन होता है। मंदिर पर रस्सी से चढ़ा जाता है, लोग उनके ऊपर पानी फेंकते हैं। अंत में जीतने वाले का सम्मान होता है। इस परंपरा के पीछे बरसों पुरानी किवदंती जुड़ी हुई है। होली वाले दिन स्थानीय लोग खासकर नौजवान लड़के लंगोट पहनकर घरों के बाहर खड़े होते हैं। गांव में ढोल नगाड़ों के साथ परिक्रमा निकाली जाती है और लोग इसमें जुड़ते चले जाते हैं।
जगनेर ब्लॉक के सरैन्धी गांव में ये परंपरागत झू मेले के रूप में प्रसिद्ध है। भव्य मेले का आयोजन होता है। इस मेले में गांव के पूर्वज बाबा अचलम के मंदिर पर हजारों लोग एकत्रित होते हैं। इस अनूठे आयोजन में गांव की पुरानी परंपरा के अनुसार लोग छह गुटों में बंट जाते हैं, जिनमें लौहरी पार्टी, थोक, हवेली, तिहाय समेत 24 थोक मोहल्ले शामिल हैं। यह परंपरा इसे खास बनाती है।
मान्यताओं के अनुसार, गांव के जागीरदार लाखन सिंह ने बाबा अचलम सिंह को यहां नियुक्त किया था, जो गांव के मध्य स्थित स्थल पर दरबार लगाकर न्याय करते थे। होली की पड़वा के दिन इस दरबार में झू दंगल का आयोजन किया जाता है, जो पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
स्थानीय निवासी योगेश शर्मा का कहना है कि सुबह से ही गांव वाले गुलाल खेलते हैं और फिर हनुमान रूपी भेष में लंगोटी पहनकर अपने घरों के बाहर खड़े हो जाते हैं। इस दौरान गांव का नट ढोल-नगाड़े बजाते हुए पूरे गांव की परिक्रमा करता है, जिसके पीछे सभी लोग जुड़ते जाते हैं और अंत में बाबा अचलम के दरबार में पहुंचते हैं।