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Bareilly News: बरेली के मैक्स लाइफ अस्पताल में होता रहा मुर्दे का इलाज, डिटर्जेंट पिलाकर मारने का आरोप

मरीज को दवा खिलाये बगैर मंगवाते रहे हजारों की दवाएं, करते रहे जांचे

बरेली। (Bareilly News) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात कर रहे हों और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार शिकंजा कस रहे हों लेकिन बरेली जनपद में निजी अस्पताल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में स्थित मैक्स लाइफ अस्पताल में मुर्दे का इलाज किया जा रहा था। ताकि, तीमारदारों से ज्यादा से ज्यादा पैसा ऐंठे जा सके। वेंटिलेटर पर लिटाकर मृत मरीज का इलाज किए जाने के बाद अस्पातल प्रशासन ने पीड़ित परिवार को लंबा-चौड़ा बिल थमा दिया। जब परिजनों ने वेंटिलेटर से शव हटाकर छुट्टी करने की गुजारिश की तो अस्पताल कर्मियों ने कहा कि मशीन के अनुसार अभी मरीज में जान है। अस्पताल के डॉक्टरों की बेशर्मी की पराकाष्ठा उस वक्त पार हो गई जब वह दो दिन तक लाश का इलाज करते रहे। परिजनों की जिद पर भी लाश नहीं देने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस की मदद मांगी तो पत्रकार भी मौके पर पहुंचे। अस्पताल की बदनामी के डर से मरीज की मृत्यु के बाद 80 हजार का बिल बनाकर बड़ी मुश्किल से शव दिया। पीड़ित परिवार ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। (Bareilly News)

(Bareilly News) गब्बर इज बैक फ़िल्म की तर्ज पर ऐंठते रहे पैसे

आपने अक्षय कुमार की फ़िल्म ‘गब्बर इज बैक’ तो देखी ही होगी। फ़िल्म में एक नामी अस्पताल में मुर्दे का इलाज करके लाखों रुपये का बिल थमाया जाता है। ठीक ऐसी ही कहानी मैक्स लाइफ अस्पताल में इलाज कराने गए शाहजहांपुर जनपद के हथौड़ा निवासी जगदीश राठौर की है। इस अस्पताल के लुटेरे डॉक्टर गरीब परिवार को तब तक लूटते रहे जब तक मरीज की लाश सही रही। जब लाश खराब होनी शुरू हुई तब भी डॉक्टर वेंटिलेटर पर डाल कर पैसे ऐंठने की जुगत में लगे रहे।

गरीब परिवार को अस्पताल वालों ने लूटा
शाहजहांपुर जनपद के रहने वाले जगदीश राठौर के परिवार में उनकी पत्नी फूलमती, दो बेटे अवरेश राठौर, अनूप राठौर और बेटी रूबी राठौर हैं। जगदीश राठौर की तबियत पहले से थोड़ी खराब रहती थी। लेकिन 4 नवंबर 2024 को उनकी तबियत अचानक खराब हो गई। परिवार वालों ने उन्हें जिला अस्पताल शाहजहाँपुर में भर्ती कराया। तबियत ठीक न होने पर डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ या बरेली में भर्ती कराने की सलाह थी। डॉक्टरों ने उन्हें रेफर किया। हालत सही नहीं होने पर परिवार वाले 5 नवंबर को शाहजहाँपुर के आधा दर्जन अस्पतालों में चक्कर काटते रहे लेकिन किसी अस्पताल ने उन्हें भर्ती नहीं किया। रोहिलखण्ड अस्पताल बंथरा में भी जबाव हो गया।

एम्बुलेंस चालक ने कराया भर्ती
मृतक के बेटे की माने तो उसे कोई जानकारी नहीं थी वह जिस एम्बुलेंस में अपने पापा को लेकर गया था उसके चालक ने बरेली के मैक्स लाइफ अस्पताल में भर्ती करवाया। इलाज शुरू हुआ और जिस दिन जगदीश भर्ती कराए गए थे उस दिन उन्हें कुछ फायदा हुआ।

दूसरे दिन से बिगड़ी हालत, हजारों की दवाओं की कालाबाजारी
बुधवार को उनकी हालत फिर बिगड़ गई। इस दौरान डॉक्टरों ने कई जांचे कराई और बोतलें चढ़ानी शुरू की। डॉक्टर कभी 7 हजार की दवा लिखते तो कभी 8 हजार की दवा लिखते। पीड़ित पुत्र ने बताया कि अस्पताल कर्मचारी दवा लेकर अंदर जाते और फिर दवा लिख देते थे। हम लोगों को अंदर नहीं जाने देते थे। दवा खिलाई जाती ही नहीं थी क्योंकि कोई रैपर वगैरह आईसीयू में नहीं मिलते थे ना पापा को परिजनों के सामने दवा खिलाई जाती थी। अस्पताल में भर्ती अन्य तीमारदारों का भी आरोप है कि दवाएं लिखी तो जाती हैं और परिजन दवाएं अस्पताल के स्टाफ को दे देते हैं लेकिन वह दवाएं फिर से स्टोर पर बैकडोर से आ जाती हैं।

डॉक्टरों ने किया सही करने का वादा, लेकिन हुई मौत
पीड़ितों की माने तो डॉक्टरों ने उन्हें मरीज के फेफड़ो में दिक्कत, टीवी की शिकायत और निमोनिया की बीमारी बताते हुए 5 दिन में ठीक होने का वादा किया और आईसीयू में भर्ती किया था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अस्पताल को जिंदा जा रहा मरीज मरकर वापस आएगा। अगर ये बात पता होती तो वह अपने मरीज को लखनऊ लेकर जाते।

डिटर्जेंट पिलाकर मारने का आरोप
पीड़ित परिवार ने अस्पताल के कर्मचारियों पर डिटर्जेंट पिलाकर हत्या करने का आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि शुक्रवार तक उनका मरीज बोल रहा था हाथ पैर हिला रहा था लेकिन शनिवार को कर्मचारियों ने डिटर्जेंट लाने को कहा। परिजनों ने जब पूछा डिटर्जेंट किस लिये? तो वह बोले कि पेट साफ करना है। जब परिजन दोबारा अंदर गए तो कटोरी में थोड़ा घुला हुआ डिटर्जेंट बचा था बाकी उन्हें पिला दिया गया था। इसके अलावा स्वीपर ने उनके गुदाद्वार में हाथ डालकर मल साफ किया। इसके बाद उनकी बोलती बंद हो गई और हाथ पैर भी हिलना बन्द हो गए। ये घटना बीते शनिवार को घटित हुई।

तीन दिन मुर्दे को वेंटिलेटर पर रखा
अगर परिजनों की माने तो जगदीश की मौत शनिवार को ही हो गई थी लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम (वेंटिलेटर) पर रख दिया। डॉक्टर पैसे ऐंठने के लिए परिजनों से कहते रहे अभी वह नींद में हैं। परिजन भी वेंटीलेटर पर देखकर आये तो मशीन की पम्प से उनके शरीर में हलचल होती दिखी। लेकिन वह मर चुके थे। रविवार और सोमवार को कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों को अनहोनी का शक हुआ उन्होंने कहा मशीन से हटाकर छुट्टी दे दीजिये। तो अस्पताल कर्मी बोले छुट्टी नहीं मिल पाएगी।

मौत के बाद थमा दिया मोटा बिल
परिजनों ने जब छुट्टी की रट लगाई तो मंगलवार को उन्हें 75000 का मोटा बिल थमा दिया गया। ये बिल दवाओं को छोड़कर था। सारी दवाएं नगद ही आती रहीं।

डॉक्टर के बजाय अनट्रेंड करते हैं इलाज
अस्पताल में आये तीमारदारों का आरोप है कि यहां आईसीयू तक मे डॉक्टर इलाज करने नहीं आते हैं। अनट्रेंड वार्डब्वॉय मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। इस मरीज के साथ भी इन्हीं नौसिखिये वार्डब्वॉय ने इलाज करके जिंदगी छीन ली। कुल मिलाकर अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्रों से आये मरीजो को जमकर लूटा जाता है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से अस्पतालों का धंधा फलफूल रहा है। गरीब आदमी चाहे अपनी जमीन खेत बेचकर मरीज के इलाज में लगा दे लेकिन अस्पताल संचालकों के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

परिजनों ने काटा हंगामा
मरीज की मौत के बाद भी अस्पताल में डॉक्टर दो दिनों तक इलाज करते रहे, मोटे बिल के चक्कर में वह शव नहीं दे रहे थे तो परिजनों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पाकर पुलिस पहुंची और पत्रकार भी पहुंच गए। घण्टों चले हंगामे के बाद परिजन पैसा न होने के कारण अस्पताल से चले गए। बाद में अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को बुलाकर पैसे लेकर शव उनके सुपुर्द किया। लेकिन मृत्यु प्रमाणपत्र और इलाज के कागज फिर भी नहीं दिये।

बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
अस्पताल में मरीज के साथ मौजूद लोगों ने बच्चों को मौत की सूचना भी नहीं दी थी क्योंकि उनका रो रो कर बुरा हाल हो जाता। लेकिन जब पिता की लाश घर पहुंची तो मोहल्ले में कोहराम मच गया। परिजनों के साथ सभी का रो रोकर बुरा हाल था। घर के कमाऊ इंसान के जाने के गम में परिवार के लोग गमगीन रहे। अब बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। घर की जिम्मेदारी अब नाबालिग बच्चों पर आ गई है। डॉक्टरों की कारस्तानी की बजह से एक हंसता खेलता परिवार तबाह हो गया है। परिजनों ने अस्पताल और उसके डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है।

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