उत्तर प्रदेशदेश

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, कलश स्थापना पूजा विधि

उपासना करने से साधक की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं, साथ ही मां दुर्गा की विशेष कृपा भी प्राप्त होती हैं।

नई दिल्ली। (Chaitra Navratri 2025) हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। इसका समापन नवमी तिथि पर किया जाता है। इस बार 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जो 6 अप्रैल को समाप्त होंगी। ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य पूजा को समर्पित है। इस अवधि में इनकी उपासना करने से साधक की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं, साथ ही मां दुर्गा की विशेष कृपा भी प्राप्त होती हैं। (Chaitra Navratri 2025)

(Chaitra Navratri 2025) पृथ्वी लोक पर आती हैं माता

कहते हैं नवरात्रि के दिनों में देवी पृथ्वी लोक पर आती हैं। इसलिए उनकी आराधना हमेशा विधि-विधान से करनी चाहिए। इस बार देवी हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जो बेहद शुभ और धन लाभ का संकेत है। इस दौरान रेवती नक्षत्र और ऐन्द्र योग के साथ-साथ हिंदू नववर्ष का संयोग भी बन रहा है। इस संयोग में माता की पूजा पूर्ण विधि से करने पर वह प्रसन्न होती हैं और सभी दुखों को हरती है।

कलश स्थापना विधि

  • पूजा से पहले कलश स्थापना का विधान है।
  • आप सबसे पहले एक मिट्टी के पात्र को लेकर उसमें थोड़ी सी मिट्टी डाल दें।
  • फिर इस पात्र में जौ के बीज डालकर उसे मिलाएं
  • इसके बाद मिट्टी के पात्र पर पानी से छिड़काव करें।
  • अब आप एक तांबे का लोटा लेकर उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
  • उसके ऊपरी हिस्से में मौली बांधकर साफ जल भरें।
  • इस जल में दूब, अक्षत, सुपारी और कुछ पैसे रख दें।
  • अशोक की पत्तियां कलश के ऊपर रख दें।
  • अब पानी के एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर मौली बांध दें।
  • इस नारियल को कलश के बीच में रख दें, और बाद में इसे पात्र के मध्य में स्थापित कर दें।

पूजन विधि

  • नवरात्रि की पूजा से पहले विधि-विधान से घट स्थापना करें।
  • वहीं नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री माता की पूजा की जाती है।
  • आप पूजा करने के लिए सबसे पहले अग्यारी करें और उसपर लौंग का जोड़ा रखें
  • अब देवी के समक्ष ज्योति जलाएं।
  • फिर कुछ मौसमी फल और बताशे प्रसाद के रूप में रखें।
  • अब कुमकुम, हल्दी, सफेद चंदन, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें।
  • इसके अलावा आप पान, सुपारी, लौंग, नारियल 16 श्रृंगार का सामान चढ़ा सकते हैं।
  • नवरात्रि के पहले दिन देवी को सफेद रंग का पुष्प अर्पित करें।
  • फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • अब मां शैलपुत्री के बीज मंत्रों का जाप करें और आरती करना शुरू करें।
  • अंत में माता की आरती करते हुए गलतियों की माफी मांगे।

घटस्थापना शुभ मुहूर्त

1. कलश स्थापना का पहला मुहूर्त
प्रातः 6:15 बजे से प्रातः 7:22 बजे तक।

2. नवरात्रि के घटस्थापना के लिए दूसरा शुभ मुहूर्त
प्रातः 11:46 से दोपहर 12:33 बजे के बीच घटस्थापना कर सकते हैं।

कलश स्थापना के लिए सामग्री
मिट्टी, मिट्टी का घड़ा, मिट्टी का ढक्कन, कलावा, जटा वाला नारियल, जल, गंगाजल, लाल रंग का कपड़ा, एक मिट्टी का दीपक, मौली, थोड़ा सा अक्षत, हल्दी।

मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार की लिस्ट
लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, काजल, मेहंदी, महावर, शीशा, बिछिया, इत्र, चोटी, गले के लिए माला या मंगलसूत्र, पायल, नेल पेंट, लिपस्टिक, रबर बैंड, नथ, गजरा, मांग टीका, कान की बाली, कंघी, शीशा आदि।

अखंड ज्योति के लिए सामग्री
पीतल या मिट्टी का साफ दीया, रुई की बत्ती, रोली या सिंदूर, चावल।

नवरात्रि कैलेंडर

  • प्रतिपदा 30 मार्च 2025 शैलपुत्री
  • द्वितीया 31 मार्च 2025 ब्रह्मचारिणी
  • तृतीया 31 मार्च 2025 चंद्रघंटा
  • चतुर्थी 02 अप्रैल 2025 कुष्मांडा
  • पंचमी 03 अप्रैल 2025 स्कंदमाता
  • षष्ठी 04 अप्रैल 2025 कात्यायनी
  • सप्तमी 05 अप्रैल 2025 कालरात्रि
  • अष्टमी व नवमी 06 अप्रैल 2025 महागौरी व सिद्धिदात्री

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button