उत्तर प्रदेशलखनऊ

Gomti River News: गोमती नदी के पुनरुद्धार के उद्देश्य से लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

गोमती पुनरुद्धार हेतु नीति, तकनीक, वित्त एवं जनसहभागिता पर व्यापक मंथन

Gomti River News
लखनऊ। (Gomti River New) राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यशाला “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोमती नदी के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल की ठोस नींव रखी गई। (Gomti River News)

(Gomti River News) गोमती को स्वच्छ रखना ही उद्देश्य

इस व्यापक एवं बहुआयामी कार्यशाला का उद्देश्य गंगा की प्रमुख सहायक नदी गोमती को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ, सतत एवं जीवनदायिनी स्वरूप में पुनर्स्थापित करने के लिए एक समग्र, वैज्ञानिक, व्यावहारिक तथा दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना रहा, जिससे नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक सुदृढ़, समन्वित और प्रभावी कार्ययोजना का निर्माण किया जा सके।

कार्यशाला में नीति निर्माण, वित्तीय रणनीति, तकनीकी समाधान, संस्थागत ढांचा, संचालन प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। इसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद, पर्यावरणविद, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन एवं विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए गोमती नदी के पुनरुद्धार की आवश्यकता, उसकी वर्तमान चुनौतियों तथा दीर्घकालिक समाधान की दिशा पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात राज्यसभा सांसद एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल, ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में विख्यात एवं तरुण भारत संघ के संस्थापक राजेन्द्र सिंह तथा भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, एवीएसएम, एसएम ने अपने संबोधनों में नदी संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर बल दिया। वहीं विशेष संबोधन में लखनऊ नगर निगम की महापौर सुषमा खारखवाल ने शहरी स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज नियंत्रण एवं नागरिक सहभागिता के माध्यम से गोमती को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए नगर निगम की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसमें जल प्रवाह की कमी, गाद जमाव, नदी तल की बिगड़ती संरचना, तटों पर अतिक्रमण, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के अनियंत्रित प्रवाह जैसे प्रमुख कारणों की विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि लखनऊ महानगर क्षेत्र में गोमती प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वर्षा जल नालियों में लगातार मिश्रित होता सीवेज है, जो बिना उपचार के सीधे नदी में प्रवाहित हो रहा है। इसके चलते जल गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आई है, जिससे जलीय जीवन, मानव स्वास्थ्य और नदी की स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा वित्तीय सत्र में गोमती पुनरुद्धार परियोजना के लिए आवश्यक संसाधनों के आकलन और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर व्यापक चर्चा हुई। राज्य बजट, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों, निजी निवेश, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही Finance+ मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें वित्तीय निवेश के साथ-साथ तकनीकी नवाचार, कुशल प्रबंधन और जनसहभागिता को जोड़ते हुए एक समग्र विकास मॉडल अपनाने पर बल दिया गया।

संस्थागत ढांचे और संचालन रणनीति से जुड़े सत्र में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक मजबूत और केंद्रीकृत तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि एक समर्पित केंद्रीय एजेंसी का गठन किया जाए, जो योजना के समन्वय, निगरानी और समयबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित कर सके। इसके अंतर्गत औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू कचरा और सीवेज प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने, प्रमुख नालों और औद्योगिक इकाइयों की सख्त निगरानी तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों को कठोरता से लागू करने पर जोर दिया गया।

तकनीकी समाधान से संबंधित सत्र में अपशिष्ट जल को एक देयता नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर व्यापक सहमति बनी। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट तकनीकों और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों के माध्यम से अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग कर जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस अवसर पर VA TECH WABAG, SUEZ India तथा AlphaMERS जैसी अग्रणी कंपनियों ने “वन सिटी वन ऑपरेटर” मॉडल, अत्याधुनिक सीवेज शोधन तकनीक, जल पुनर्चक्रण एवं स्मार्ट मॉनिटरिंग प्रणालियों पर आधारित नवाचार प्रस्तुत किए, जिन्हें प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक बताया।

नागरिक समाज की भूमिका पर केंद्रित सत्र में यह स्पष्ट किया गया कि बिना जनसहभागिता के कोई भी नदी पुनरुद्धार अभियान सफल नहीं हो सकता। सोशल एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन (SBCC) के माध्यम से लोगों की सोच और व्यवहार में परिवर्तन लाने, स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देने और नदी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया गया। “रिवर्स ऑफ इंडिया” और “पॉन्ड्स ऑफ इंडिया” जैसे अभियानों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब स्थानीय समुदाय स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी लेते हैं, तब नदी और तालाबों का पुनर्जीवन स्थायी रूप से संभव हो पाता है।

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